पांच तत्त्व से बनी हे सृस्टि ,
आकाश उसमे सबसे विशाल है,
सबको देखता है ऊपर से ,
और सबके कर्मो का साक्षी है.
सुनता सबकी बातें है मगर फिर भी चुप वो रहता है.
देखोना कितना विशाल ये आकाश है.
बदल, सूरज चाँद और तारे,
उसके आँचल में रहते है.
टूटते तारे और ग्रह भी उसमे आके छुपते है.
सबको वो सम्भालता है,
और सबके हरकतो से वो वाकिफ है.
देखोना कितना विशाल ये आकाश है.
कितना फेला है वो ये कोई न जान पाया,
कितनी उसकी उम्र है ये कोई ना बता पाया .
जितना साफ है उसका मन,
उतना ही साफ़ है उसका तन.
कोनसे साबू से ये नहाता है,
ये हमेशा साफ सूत्रा रहता है.
देखोना कितना विशाल ये आकाश है.
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