आये हो यहाँ तक,तो शुक्रिया हम केहेना चाहे,
आये ही हो तो कुछ मेरा लिखा पद के जाये,
दिल से लिखा है,
पसंद आये तो दो तारीफ के शब्द लिख दिजीये,
नहीं तो कुछ अपने सुझाव लिख दिजीये

Monday, December 16, 2013

आज तुम्हे देखके याद बहुत वो दिन आये,
जब एक साथ ख़ुशी मे दिन हमने थे बिताये.
कहने को तो बहुत कुछ था,
मगर हम केहेना पाये.
दिल कि बात बताना चाहे ,
मगर लब्ज जुबान पर न आये.
फासले अब हुए थे बोहत,
हम कैसे नज़दीकियां लाये,
समय हात से निकल जा रहा था,
हम रोक उसे न पाये.
तुम हमारी ज़िन्दगी में वापस आ जाओ,
ये हम तुम्हे कहना चाहे.
आगे ज़िन्दगी क्या मोड़ ले ले ,
ये कोई ना बता पाये.

लीना पटेल 

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