आये हो यहाँ तक,तो शुक्रिया हम केहेना चाहे,
आये ही हो तो कुछ मेरा लिखा पद के जाये,
दिल से लिखा है,
पसंद आये तो दो तारीफ के शब्द लिख दिजीये,
नहीं तो कुछ अपने सुझाव लिख दिजीये

Sunday, May 18, 2014

बादल



                                   

      आसमान में फैलाये है किसीने सूत के गुबारे ,
      थोड़े है मोटे,थोड़े है पतले मगर सब लगते है प्यारे.
      लोग उन्हें बादल कहते है,और लगते है मुझे भी वो प्यारे.
      आसमान की शोभा बधाते है ये सूत के गुबारे.
      बादल के अलग रूप होते है और अलग उनके नाम,
      स्ट्रटुस कुमुलुस धरती के पास होते हैं.
            बीचमे  आल्टोस्ट्राटुस अल्टोक्यूमुलुस रहते है
      और ऊपर सिरस रहता है.
      कुमुलोनिम्बुस सबसे मोटा और ऊँचा होता है,
      आसमान में सर उठा के खड़ा रहता है.
      यू तो वो शांत होते है,
      मगर बारिश के मौसम में अपना रंग दिखाते है,
      गरजते हैं बरसते हैं धरती को नहलाते हैं.
      कैसे भी हो,वो आसमान की शोभा बधाते  हैं.

Sunday, February 16, 2014

सुख गयी थी धरती,
तप रहा था उसका तन,
कई समय बीत गया था,
मिला नहीं था प्रीतम.


तभी हवा का झोका ,
प्यार से उसे आके बोला,
देख आसमान कि और,
आ जाया तेरा प्रीतम.


आसमान कि तरफ देखा ,
तो आसमान ने बदला था अपना रंग,
हो जाया था वो काला
काले बदलो के कारन.


बदल ने गरजकर अपने आने का किया इशारा
और धरती आँखें पलके उसके पहेले वो आया उसकी और.

आसमान से आयी वो पहेले सावन कि बौछार,
धरती को छूते ही धरती ने फैलायी अपनी खुश्बू सारी और.


बारिश को जिस्म में सिमटकर,
धरती ने बदला अपना रंग,
हो गयी वो हरी और खिल उठा उसका रंग.
धरती ख़ुशी से झ़ुमि और फैलायी हरयाली चारो और.
और छा गया धरती पे प्यार का मौसम,प्यार का मौसम.
 
     हे अमलतास !
     दिल कुश हो जाता था तुम्हे हवा के झोको के साथ झ़ुलते हुए देखकर.
     मगर आज ऐसा क्या हो गया के उसी हवा के झोकेने तुम्हे ज़मीन पर लेटा दिया.

Tuesday, February 4, 2014

सुभा सेर पर निकलते हुए,शुक्रिया हम केहना चाहे,
रात को नींद ने साथ दिया  इसलिए नए दिन का स्वागत हम ख़ुशी से कर पाये.

हवा में थोड़ी ठंडक थी,सर्दी का मौसम जो आया.
एक गरम चाय के प्याली ने उसका माज़ा और बढ़ाया.

रास्ते पे चल रहे थे,जब हवा का झोका प्यार से चुने आया.
मेरे बालो के साथ खेलके मेरा माजक उसने उदय.

आसमान राह देख रहा था ,कब सूरज अपनी किरणे फैलाये.
पांची भी उठ गयेथे इस अद्भुत नज़ारे को देखने.

रास्तेमे और भी सेराई थे अपने गरम कपडे पेहने,
सारदी के मौसम में निकल पड़े थे अपनी सेहत बनाये रखने.

हर मौसम का एक अलग नशा है,अगर आप उसे करना चाहो ,
हर दिन का एक अलग रंग है ,अगर आप उसमे घुलना चाहो.

हर किसी के बास्की बात नहीं ,जो ये मजे लूट सके,
वो खुशनसीब इंसान है जो ये सब कर सके.



लीना पटेल


पांच तत्त्व से बनी हे सृस्टि ,
आकाश उसमे सबसे विशाल है,
सबको देखता है ऊपर से ,
और सबके कर्मो  का साक्षी है.
सुनता सबकी बातें है मगर फिर भी चुप वो रहता है.
देखोना कितना विशाल ये आकाश है.

बदल, सूरज चाँद और तारे,
उसके आँचल में रहते है.
टूटते तारे और ग्रह भी उसमे आके छुपते है.
सबको वो सम्भालता है,
और सबके हरकतो से वो वाकिफ है.
देखोना कितना विशाल ये आकाश है.

कितना फेला है वो ये कोई न जान पाया,
कितनी उसकी उम्र है ये कोई ना बता पाया .
जितना साफ है उसका मन,
उतना ही साफ़ है उसका तन.
कोनसे साबू से ये नहाता है,
ये हमेशा साफ सूत्रा रहता है.
देखोना कितना विशाल ये आकाश है.