आये हो यहाँ तक,तो शुक्रिया हम केहेना चाहे,
आये ही हो तो कुछ मेरा लिखा पद के जाये,
दिल से लिखा है,
पसंद आये तो दो तारीफ के शब्द लिख दिजीये,
नहीं तो कुछ अपने सुझाव लिख दिजीये

Monday, December 16, 2013

आज तुम्हे देखके याद बहुत वो दिन आये,
जब एक साथ ख़ुशी मे दिन हमने थे बिताये.
कहने को तो बहुत कुछ था,
मगर हम केहेना पाये.
दिल कि बात बताना चाहे ,
मगर लब्ज जुबान पर न आये.
फासले अब हुए थे बोहत,
हम कैसे नज़दीकियां लाये,
समय हात से निकल जा रहा था,
हम रोक उसे न पाये.
तुम हमारी ज़िन्दगी में वापस आ जाओ,
ये हम तुम्हे कहना चाहे.
आगे ज़िन्दगी क्या मोड़ ले ले ,
ये कोई ना बता पाये.

लीना पटेल 

Saturday, December 14, 2013

प्राप्तकाल के सनाते में जब हम लिखने बैठते ,
दिमाग सोया रहता था,
इसलिए दिल से लिखा करते.
लिखने में बड़ा सुकून मिलता था और सारा दिन खिल उठता था.
कागज़ पर जो हम कलम से लिखते थे वो हमारे दिल का तूकडा था.

 

Monday, December 9, 2013


        


           बादलों क॓ मुन्दर  पर उदत॓ हुअे
           मै सुरज से गुफ्तगु   रहि थी
           जब अचानक बादलों का  समुन्दर फट गया
          ओर धरतीन॓ सस्लाम अले कुम कहा.
                                                                      
            लिना पटेल    
   

Friday, December 6, 2013

पलके उठा के देखिये तो जरा.
मेरी आँखे तुमसे कुछ केहेना चाहे .
इतनी भीड़ में, मे कैसे कहु .
मेरी दिल कि बात वो बताना चाहे .
आँखें तो दिल कि तरफ जाने का दरवाज़ा है,
दो प्यार कि नज़ारे मिले तो कभी दरवाज़ा खुलभी जाये.
पलके उठा के देखिये तो जरा,
शायद हम दोनोको एक दूसरे के दिल में रहने को जगह मिल जाये.                 
लिना पटेल