प्राप्तकाल के सनाते में जब हम लिखने बैठते ,
दिमाग सोया रहता था,
इसलिए दिल से लिखा करते.
लिखने में बड़ा सुकून मिलता था और सारा दिन खिल उठता था.
कागज़ पर जो हम कलम से लिखते थे वो हमारे दिल का तूकडा था.
दिमाग सोया रहता था,
इसलिए दिल से लिखा करते.
लिखने में बड़ा सुकून मिलता था और सारा दिन खिल उठता था.
कागज़ पर जो हम कलम से लिखते थे वो हमारे दिल का तूकडा था.
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