आये हो यहाँ तक,तो शुक्रिया हम केहेना चाहे,
आये ही हो तो कुछ मेरा लिखा पद के जाये,
दिल से लिखा है,
पसंद आये तो दो तारीफ के शब्द लिख दिजीये,
नहीं तो कुछ अपने सुझाव लिख दिजीये

Friday, December 6, 2013

पलके उठा के देखिये तो जरा.
मेरी आँखे तुमसे कुछ केहेना चाहे .
इतनी भीड़ में, मे कैसे कहु .
मेरी दिल कि बात वो बताना चाहे .
आँखें तो दिल कि तरफ जाने का दरवाज़ा है,
दो प्यार कि नज़ारे मिले तो कभी दरवाज़ा खुलभी जाये.
पलके उठा के देखिये तो जरा,
शायद हम दोनोको एक दूसरे के दिल में रहने को जगह मिल जाये.                 
लिना पटेल    

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