आये हो यहाँ तक,तो शुक्रिया हम केहेना चाहे,
आये ही हो तो कुछ मेरा लिखा पद के जाये,
दिल से लिखा है,
पसंद आये तो दो तारीफ के शब्द लिख दिजीये,
नहीं तो कुछ अपने सुझाव लिख दिजीये

Sunday, February 16, 2014

सुख गयी थी धरती,
तप रहा था उसका तन,
कई समय बीत गया था,
मिला नहीं था प्रीतम.


तभी हवा का झोका ,
प्यार से उसे आके बोला,
देख आसमान कि और,
आ जाया तेरा प्रीतम.


आसमान कि तरफ देखा ,
तो आसमान ने बदला था अपना रंग,
हो जाया था वो काला
काले बदलो के कारन.


बदल ने गरजकर अपने आने का किया इशारा
और धरती आँखें पलके उसके पहेले वो आया उसकी और.

आसमान से आयी वो पहेले सावन कि बौछार,
धरती को छूते ही धरती ने फैलायी अपनी खुश्बू सारी और.


बारिश को जिस्म में सिमटकर,
धरती ने बदला अपना रंग,
हो गयी वो हरी और खिल उठा उसका रंग.
धरती ख़ुशी से झ़ुमि और फैलायी हरयाली चारो और.
और छा गया धरती पे प्यार का मौसम,प्यार का मौसम.

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